Pahli दी फर्स्ट वेब पोस्ट, अमित सर का
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Pahli दी फर्स्ट वेब पोस्ट, अमित सर का

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आशुतोष अमित

सामान्य रूप से बाबा से मिलने वाले को पहले दीक्षा लेना होता था । यम-नियम मानना होता था पर अर्रहा धर्म महाचक्र इस नियम का व्यतिक्रम था, जैसा कि पहले मैंने बताया कि अर्रहा के आसपास के लोगों को पता था कि भगवान आ रहें हैं अतः वे भगवान की परीक्षा लेने या स्वयं अपनी परीक्षा देने के लिए तैयार थे,स्थानीय लोगों का तर्क था कि बिना शास्त्रार्थ के मिथला वासी किसी को भी अपना गुरु नहीं मान सकते है अतः बाबा को शास्त्रार्थ में हराने के लिए उनलोगों ने भयंकराचार्य को मंगवाया । भयंकराचार्य अद्वैतवादी व तांत्रिक थे, बाबा ने उनसे शास्त्रार्थ के लिए आचार्य इन्द्रजीत गुप्त जी को संस्कृत में , आचार्य अमुल्य रत्न षडंगी जी को बंगला तथा एक अन्य आचार्य को हिंदी में शास्त्रार्थ करने के लिए भेजा गया । सारे मर्द शास्त्रार्थ देखने के लिए जमा थे और बाबा गॉव में घुम-घुम कर भक्तों के घर व अर्रहा के पावन घरा को अपने चरण रज से पवित्र कर रहे थे । इधर भयंकराचार्य व आचार्यों का शास्त्रार्थ चल रहा था इस शास्त्रार्थ में भयंकराचार्य ने मुँह की खाई । लोग उन्हें मारने दौड़े वे किसी तरह अपना जान बचाए । उधर प्रभु भक्तों के घर माखन-मिश्री या भक्तों द्वारा अर्पित नवेद्य ग्रहण कर रहे थे । आचार्य केदार जी 'नटखट ' की पत्नी पानी के बदले दुध से प्रभु के चरण पखारे । कई लोगों ने बाबा को पान भी दिया पर पान बाबा के कुर्ते में आश्रित हुआ । साघक - असाघक सभी ने ब्रजगोपाल रूप में बाबा के दर्शन किये ।

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